Saturday, 11 July 2015

बहुमंजिला इमारतों में लगी आग तो बुझाना होगा मुश्किल

हरेंद्र नागर, फरीदाबाद :
बहुमंजिला इमारतें शहर की बेहद उजली तस्वीर प्रस्तुत करती हैं, लेकिन इस तस्वीर का एक बदरंग पहलू भी है। कभी इन इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर आग लगी तो बुझाने के लिए यह केवल आंतरिक सुरक्षा उपायों पर निर्भर होंगी। जिले में अग्निशमन विभाग के पास इतनी ऊपर तक पानी पहुंचाने के इंतजाम नहीं है। पिछले हफ्ते प्राणायाम सोसायटी की नौवीं मंजिल पर एक फ्लैट में आग लगी तो मौके पर पहुंचे अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की लाचरगी नजर आई। सोसायटी के आंतरिक सुरक्षा उपायों से आग तो बुझ गई लेकिन यह कई सवाल छोड़ गई।
आधी ऊंचाई तक भी नहीं फेंक पाएंगी पानी :
अग्निशमन विभाग के पास बहुमंजिला इमारतों की आधी ऊंचाई तक पानी पहुंचाने की भी क्षमता नहीं है। अग्निशमन विभाग के पास केवल 35 फुट (करीब 12 मीटर) ऊंचाई तक पानी फेंकने की क्षमता वाली मशीनें हैं। शहर में बहुमंजिला इमारतों की करीब 125 है। इनमें से अधिकतर की ऊंचाई 45 से 50 मीटर तक है। शहर में सबसे ऊंची इमारत आइटी पार्क है। जिसकी ऊंचाई 58 मीटर है। आपातकालीन स्थिति में यह मशीनें इमारतों की आधी ऊंचाई तक भी पानी नहीं फेंक पाएंगी। शहर में बहुमंजिला इमारतें लगातार बन रही हैं। इन इमारतों में लाखों की संख्या में लोग रह भी रहे हैं। कारगर नहीं आंतरिक सुरक्षा के उपाय : सभी बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने के आंतरिक उपाय भी किए जाते हैं, किंतु इनकी एक सीमा है। हल्की आग पर यह काबू पा सकते हैं, मगर बड़ी आग बुझाने के लिए अग्निशमन की जरूरत होती है। इसके अलावा चूंकि आग जैसी घटनाएं बहुत कम होती हैं, ऐसे में बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने के उपायों को लेकर लापरवाही बरती जाने लगती है। जरूरत पड़ने पर यह काम नहीं आते। इमारतों में आग बुझाने के उपायों के तहत पानी का एक टैंक बनाया जाता है, जिसमें निश्चित मात्रा में पानी एकत्र रहता है। अगर आग के दौरान टैंक का पानी समाप्त हो जाए तो खड़े होकर तबाही देखने के अलावा कोई चारा नहीं होगा।
हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की आवश्यकता :
शहर में बन रही बहुमंजिला इमारतों की संख्या को देखते हुए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की आवश्यकता है। गुड़गांव में इस तरह का प्लेटफार्म बन चुका है। हाइड्रोलिक प्लेटफार्म मुख्यत: बहुमंजिला इमारतों को ध्यान में रखकर ही बनाया जाता है। इसकी क्षमता 70 मीटर तक पानी पहुंचाने की होती है। सहायक अग्निशमन अधिकारी डीके नंदा का कहना है कि फरीदाबाद के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की मंजूरी साल 2012 में हो चुकी है लेकिन यह अभी तक तैयार नहीं हो पाया है।

                      
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Thursday, 9 July 2015


dental camp in ankheer

फरीदाबाद :
मानव रचना डेंटल कालेज और अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा (एबीवीजीएम) की ओर से गांव अनखीर में निशुल्क दांतों की जांच शिविर लगाया गया। शिविर में तकरीबन 110 से ज्यादा लोगों ने दांतों की जांच कराई। मानव रचना डेंटल कालेज से डा. बिन्दु अग्रवाल, डा. पुनीत खारी, डा. अमन थेपलीयाल, डा.वर्षा जैन, डा.चेतना यादव, डा.दिशा सिंह ने लोगों की जांच की। एबीवीजीएम के प्रदेश अध्यक्ष अनिल तंवर ने बताया के हर महीने किसी न किसी गांव में इस तरह के कैंप का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान एबीवीजीएम के अध्यक्ष अनुराग गुर्जर, रामवीर बिधुरी, देवेंद्र नंबरदार, विनोद गुर्जर, अजय डेढा, गौरव तंवर, सूबेदार सिंह, उमेश भाटी, रोहित तंवर, मनोज खटाना, सौरभ कारना, कपिल भडाना उपस्थित थे। ---

स्मार्ट सिटी के लिए केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा तय किए गए मापदंडों पर अपने फरीदाबाद ने अभी तक पहली जगह बनाई हुई है। लगभग हर मापदंड पर फरीदाबाद अव्वल नजर आता है। गुड़गांव से जरूर कुछ टक्कर मिली है। प्रदेश से दो स्मार्ट सिटी का चयन होना है। इनमें अपने शहर का नंबर आने की पूरी गुंजाइश है। अब तक के मापदंडाें पर फरीदाबाद अागे रहा है। अाज पेश है 'नगर निकायों कर्मचारियों के मासिक वेतन के ब्यौरा' के आधार पर दैनिक जागरण की पड़ताल। इसके लिए निर्धारित अंक हैं 5।

हरेंद्र नागर , फरीदाबाद :

कर्मचारियों के मासिक वेतन के मामले में फरीदाबाद ने प्रतिस्पर्धी शहरों गुड़गांव, अंबाला और पानीपत को काफी पीछे छोड़ दिया है। इस मामले में दूसरे नंबर पर मौजूद गुड़गांव नगर निगम का मासिक वेतन का बजट भी फरीदाबाद नगर निगम से काफी कम है। फरीदाबाद नगर निगम अपने सालाना बजट का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन पर खर्च करता है। इस मापदंड पर फरीदाबाद को शहर के अधिकतर प्रबुद्ध नागिरकों ने 5 में से 4 अंक दिए हैं।

फरीदाबाद नगर निगम कर्मचारियों का मासिक वेतन
फरीदाबाद नगर निगम अपने कर्मचारियों के वेतन व अन्य भत्तों पर हर माह करीब 11 करोड़ रुपये खर्च करता है। यह कुल बजट का 24 फीसद है। फरीदाबाद नगर निगम में 6962 पद सरकार से स्वीकृत हैं। कर्मचारियों के वेतन पर नगर निगम सालाना 23949.74 लाख रुपये खर्च करता है। नगर निगम के पास सबसे अधिक संख्या सफाई कर्मचारियों की है। इनके वेतन पर कुल वेतन का 50 फीसद करीब 5 करोड़ रुपये खर्च होता है। प्रतिद्वंदी शहरों से तुलना :

गुड़गांव नगर निगम का कर्मचारियों के वेतन पर मासिक खर्च करीब करीब 8 करोड़ रुपये का है। यह सालाना 9712.65 है। फरीदाबाद से यह काफी कम बैठता है। गुड़गांव नगर निगम कुल बजट में से वेतन पर खर्च का प्रतिशत भी फरीदाबाद से कम है। अंबाला नगर निगम का कुल सालाना बजट ही 67 करोड़ रुपये का है, जबकि पानीपत का 100 करोड़ रुपये का है। ऐसे में वहां कर्मचारियों को दिए जाने वाला वेतन फरीदाबाद नगर निगम के सामने कहीं नहीं ठहरता।

इंफोग्राफिकल :
फरीदाबाद नगर निगम

कर्मचारियों की संख्या : 6962
वेतन पर सालाना व्यय : 23949.74 लाख

वेतन पर मासिक व्यय : करीब 8 करोड़
कुल बजट का : 24 फीसद गुड़गांव नगर निगम :

वेतन पर सालाना व्यय : 9712.65 लाख
वेतन पर मासिक व्यय : करीब 8 करोड़

कुल बजट का : करीब 10 फीसद

पानीपत :
कुल सालाना बजट : 100 करोड़ रुपये

कर्मचारियों के वेतन पर अनुमानित सालाना खर्च : करीब 18 करोड़ रुपये
मासिक खर्च : करीब 1.5 करोड़ रुपयेअंबाला :

कुल सालाना बजट : 67 करोड़ रुपये
कर्मचारियों के वेतन पर अनुमानित सालाना खर्च : करीब 10 करोड़ रुपये

मासिक खर्च : करीब 85 लाख रुपये
दैनिक जागरण द्वारा दिए गए अंक :

फरीदाबाद : 5 में से 4.50
गुड़गांव : 5 में से 4

पानीपत : 5 में से 3
अंबाला = 5 में से 2

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कल पढ़ें :
स्मार्ट सिटी के नौवें मापदंड 'नगर निकायों के वर्ष 2012-13 तक के खाते का आडिट ब्यौरा' पर कितना खरा उतरता है अपना शहर। यह जानने के लिए कल पढ़ें दैनिक जागरण की पड़ताल। कुल अंक : 5

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Thursday, 18 June 2015

दयालबाग कालोनी के लोगों के लिए खुशखबरी

संवाददाता, दयालबाग :
वर्षों से सीवर जाम के कारण परेशानी झेल रहे दयालबाग कालोनी के लोगों के लिए खुशखबरी है। नगर निगम ने यहां सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व सीवरेज निकासी की योजना पर काम शुरू कर दिया है। बुधवार को नगर निगम कार्यकारी अभियंता एसके अग्रवाल, एसडीओ नवल किशाेर और जेई हवासिंह ने यहां का दौरा किया और आरडब्ल्यूएस पदाधिकारियों के साथ सीवरेज निकासी की संभावित योजनाओं पर चर्चा की।
दयालबाग कालोनी में सीवरेज लाइन तो डाली हुई है लेकिन उसकी निकासी की आज तक कोई व्यवस्था नहीं है। कालोनी की आबादी भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हमेशा सीवर ओवरफ्लो की समस्या बनी रहती है। इस समस्या को लोग करीब 15 साल से झेल रहे हैं। बार बार अधिकारियों को शिकायत देने के बाद भी उनकी समस्या का हल नहीं हुआ। निकासी न होने के कारण सीवर का पानी बैक मारकर लोगों के घरों में भर जाता है। अब हालत यह है कि लोग अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगहों पर किराए पर रहने को मजबूर हैं। यहां की आरडब्ल्यूएस भी लगातार इस समस्या को उठाती रही है। पिछले दिनों आरडब्ल्यूएस पदाधिकारियों ने नगर निगम आयुक्त अशोक शर्मा से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी थी। कार्यकारी अभियंता एसके अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र में सीवरेज निकासी के लिए 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। नगर निगम ने यहां सीवर का पानी निकासी के लिए फाइल तैयार कर ली है। इसे जल्द मंजूरी मिल जाएगी। प्रहलादपुर नाले के पास सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर पानी उसमें डाला जाएगा।
---कार्यकारी अभियंता एसके अग्रवाल ने निरीक्षण के बाद आश्वासन दिया है कि यहां सीवर की समस्या जल्द हल हो जाएगी। उन्होंने बताया कि अगर यहां यह समस्या हल हो जाती है तो हजारों लोगों को राहत मिलेगी।
- डीएस राणा, प्रधान आरडब्ल्यूएस दयालबाग

Wednesday, 29 April 2015


54 सौ मीटर ऊंचाई पर फंसा है फरीदाबाद का पर्वतारोही

हरेंद्र नागर, फरीदाबाद :
माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने गए शहर के पहले पर्वतारोही सौरभ अग्रवाल हिमालय में 5400 मीटर की ऊंचाई पर बने बेस कैंप में फंस गए हैं। मंगलवार को चाइना माउंटेनियरिंग एसोसिएशन (सीएमए) ने चीन की तरफ से माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई कर रहे पर्वतारोहियों का दौरा रद कर दिया। भूकंप में नायलम और टिगरी का बंद होने के कारण अब इनकी वापसी की समस्या खड़ी हो गई है। यह रास्ता हिमस्खलन और सड़क टूट जाने के कारण बंद है। इनकी वापसी के लिए अब चीन सरकार माथा पच्ची कर रही है।

 अब वापसी की चिंता सताने लगी : सेक्टर-17 निवासी सौरभ अग्रवाल के दल में 12 लोग हैं। शेखर बाबू इस दल का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने फोन पर बताया कि 25 अप्रैल को दल 6500 मीटर ऊंचाई पर एडवांस बेस कैंप में पहुंच गया था, किंतु मौसम खराब होने व फिर भूकंप के अनुमान के बाद उन्हें 26 अप्रैल को 5400 मीटर ऊंचाई पर बने बेस कैंप में वापस आना पड़ा। सोमवार को सीएमए की बैठक हुई। इसमें मौसम व भविष्य की परिस्थितयों पर विचार के बाद पर्वतारोहियों को वापस बुलाने या यात्रा जारी रखने पर विचार किया गया। मंगलवार को सभी पर्वतारोहियों की वापसी पर सहमति बन गई। नायलम और टिगरी का रास्ता बंद होने के कारण हो सकता है कि चीन सरकार इन्हें पहले ल्हासा तक लाए जाए। इसके बाद हवाई जहाज से नीचे पहुंचाया जाए।
तीन कारण रहे अहम :
सीएमए की बैठक में माउंट एवरेस्ट की यात्रा रोकने के तीन कारण सबसे अहम रहे। एक तो दोबारा भूकंप आने की संभावना है। दूसरे भूकंप से माउंट एवरेस्ट के रास्ते में नई दरारें बन गई हैं, जिससे यात्रा करना बेहद खतरनाक हो सकता है। तीसरे जो शेरफा (यात्रा में सहयोग करने वाले चीन व नेपाल के लोग) यात्रा में साथ चल रहे हैं, भूकंप से उनके घर व परिवार को क्षति हुई है। इसलिए वह जल्द घर लौटना चाहते हैं।


 बेहद निराश हैं सौरभ वापसी की खबर सुनकर : सौरभ अग्रवाल ने व्हा‌ट्स-एप पर हुई बातचीत में दैनिक जागरण फरीदाबाद कार्यालय को बताया कि यहां उनके दल के अलावा कई अन्य दल भी हैं। करीब 150 पर्वतारोही हैं। सभी बेस कैंप में है। वापसी की खबर सुनकर वह बेहद निराश हैं। माउंट एवरेस्ट फतेह करने का उनका सपना अधूरा रह गया है। अब पता नहीं कब मौका मिले। माउंट एवरेस्ट पर एक बार जाने के लिए 20 से 30 लाख रुपये का खर्च आता है। इसके लिए स्पोंसर ढूंढना बेहद मुश्किल है। उन्होंने कहा कि चीन सरकार सभी पर्वतारोहियों की जल्द वापसी का इंतजाम कर देगी। अनी अग्रवाल का कहना है कि पहले उन्हें सौरभ के माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने का इंतजार था अब वह उनकी वापसी की दुआ मांग रही हैं।