बहुमंजिला इमारतों में लगी आग तो बुझाना होगा मुश्किल
हरेंद्र नागर, फरीदाबाद :बहुमंजिला इमारतें शहर की बेहद उजली तस्वीर प्रस्तुत करती हैं, लेकिन इस तस्वीर का एक बदरंग पहलू भी है। कभी इन इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर आग लगी तो बुझाने के लिए यह केवल आंतरिक सुरक्षा उपायों पर निर्भर होंगी। जिले में अग्निशमन विभाग के पास इतनी ऊपर तक पानी पहुंचाने के इंतजाम नहीं है। पिछले हफ्ते प्राणायाम सोसायटी की नौवीं मंजिल पर एक फ्लैट में आग लगी तो मौके पर पहुंचे अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों की लाचरगी नजर आई। सोसायटी के आंतरिक सुरक्षा उपायों से आग तो बुझ गई लेकिन यह कई सवाल छोड़ गई।
आधी ऊंचाई तक भी नहीं फेंक पाएंगी पानी :
अग्निशमन विभाग के पास बहुमंजिला इमारतों की आधी ऊंचाई तक पानी पहुंचाने की भी क्षमता नहीं है। अग्निशमन विभाग के पास केवल 35 फुट (करीब 12 मीटर) ऊंचाई तक पानी फेंकने की क्षमता वाली मशीनें हैं। शहर में बहुमंजिला इमारतों की करीब 125 है। इनमें से अधिकतर की ऊंचाई 45 से 50 मीटर तक है। शहर में सबसे ऊंची इमारत आइटी पार्क है। जिसकी ऊंचाई 58 मीटर है। आपातकालीन स्थिति में यह मशीनें इमारतों की आधी ऊंचाई तक भी पानी नहीं फेंक पाएंगी। शहर में बहुमंजिला इमारतें लगातार बन रही हैं। इन इमारतों में लाखों की संख्या में लोग रह भी रहे हैं। कारगर नहीं आंतरिक सुरक्षा के उपाय : सभी बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने के आंतरिक उपाय भी किए जाते हैं, किंतु इनकी एक सीमा है। हल्की आग पर यह काबू पा सकते हैं, मगर बड़ी आग बुझाने के लिए अग्निशमन की जरूरत होती है। इसके अलावा चूंकि आग जैसी घटनाएं बहुत कम होती हैं, ऐसे में बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने के उपायों को लेकर लापरवाही बरती जाने लगती है। जरूरत पड़ने पर यह काम नहीं आते। इमारतों में आग बुझाने के उपायों के तहत पानी का एक टैंक बनाया जाता है, जिसमें निश्चित मात्रा में पानी एकत्र रहता है। अगर आग के दौरान टैंक का पानी समाप्त हो जाए तो खड़े होकर तबाही देखने के अलावा कोई चारा नहीं होगा।
हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की आवश्यकता :
शहर में बन रही बहुमंजिला इमारतों की संख्या को देखते हुए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की आवश्यकता है। गुड़गांव में इस तरह का प्लेटफार्म बन चुका है। हाइड्रोलिक प्लेटफार्म मुख्यत: बहुमंजिला इमारतों को ध्यान में रखकर ही बनाया जाता है। इसकी क्षमता 70 मीटर तक पानी पहुंचाने की होती है। सहायक अग्निशमन अधिकारी डीके नंदा का कहना है कि फरीदाबाद के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की मंजूरी साल 2012 में हो चुकी है लेकिन यह अभी तक तैयार नहीं हो पाया है।
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